हालांकि महमूद अब्बास के नेतृत्व वाला संगठन सारी उम्मीद बाइडन से लगाए हुए है और वही पुरानी ग़लतियां फिर दोहराने पर तुला हुआ है तो इस बीच ग़ज़्जा पट्टी के फ़िलिस्तीनी संगठनों ने एक संदेश दिया है। संदेश है कि अधिकार लेने के लिए दर दर की भीख नहीं बल्कि मज़बूत इरादे, दृढ़ता और क़ुरबानियों की ज़रूरत होती है। जितने भी राष्ट्र साम्राज्यवाद के क़ब्ज़े से आज़ाद हुए हैं उन सबने इसी मार्ग पर चलकर कामयाबियां हासिल की हैं।
हिज़्बुल्लाह के प्रमुख सैयद हसन नसरुल्लाह ने अलमयादीन टीवी के साथ लंबे इंटरव्यू में ख़ुलासा किया कि ईरान की क़ुद्स फ़ोर्स के कमांडर जनरल क़ासिम सुलैमानी ने ग़ज़्ज़ा पट्टी के फ़िलिस्तीनी संगठनों को कोरनेट मिसाइल उपलब्ध कराए थे। इन मिसाइलों की क़ीमत सीरियाई नेतृत्व ने अपने बजट से अदा की थी और ग़ज़्ज़ा पट्टी में फ़िलिस्तीनी संगठनों को यह मिसाइल दिलवाने में उसने भरपूर सहयोग किया था। यह ख़ुलासा पहले फ़िलिस्तीनी संगठनों की ओर से होना चाहिए था क्योंकि इन संगठनों को इस बड़ी मदद पर आभार जताना चाहिए था।
फ़िलिस्तीन में साम्प्रदायिकता बहुत कम है वहां मुसलमान और ईसाई मिलकर ज़ायोनी क़ब्ज़े का मुक़ाबला करते हैं मगर आजकल हम देख रहे हैं कि ग़ज़्ज़ा पट्टी में ईरान और प्रतिरोधक मोर्चे के मामले में सांप्रदायिकता दिखाई जा रही है जहां से फ़िलिस्तीनी संगठनों को यह सारे मिसाइल और ड्रोन विमान मिले जिनकी मदद से फ़िलिस्तीनी संगठनों ने शक्ति का संतुलन अपने पक्ष में बदला है।
फ़िलिस्तीन का मुद्दा संप्रदायिक बंटवारे से बहुत ऊपर है इसीलिए दुनिया भर से सज्जन व्यक्तियों ने इस मुद्दे का समर्थन किया। इसके लिए जापानियों, अमरीकियों, आयरलैंडियों, अरबों और विभिन्न मतों के मुसलमानों ने क़ुरबानियां दी हैं। शीया समुदाय इस लड़ाई में शुरू से ही निर्णायक मदद कर रहा है।
कोरनेट मिसाइल जो ईरान के नेतृत्व वाले प्रतिरोधक मोर्चे से ग़ज़्ज़ा पट्टी के फ़िलिस्तीनी संगठनों को मिले उन्होंने लेबनान युद्ध में इस्राईल के मीरकावा टैंकों को ध्वस्त करके रख दिया और इन्हीं मिसाइलों ने गज़्ज़ा को एसी ताक़त दी कि इस्राईली सेना ग़ज़्ज़ा के इलाक़े में क़दम रखने की हिम्मत नहीं कर पाती। यह मिसाइल गज़्ज़ा पहुंच जाने के बाद से इस्राईल कोई भी झड़प कुछ दिनों से ज़्यादा नहीं जारी रख पाया बल्कि संघर्ष विराम करने पर मजबूर हुआ।
हम फ़िलिस्तीनियों को एक बार फिर चेतावनी देते हैं कि वह सांप्रदायिक चक्करों में हरगिज़ न पड़ें। फ़िलिस्तीन का स्थान वही प्रतिरोधक मोर्चा है जिसका नेतृत्व ईरान कर रहा है जिसे दुनिया के सारे भले इंसान समर्थन दे रहे हैं। इसी मोर्चे ने अमरीका और इस्राईल को टक्कर दी है। वरना उनके लिए कितना आसान था कि हाथ खड़े कर लेते और अमरीका व इस्राईल की पंक्ति में अपनी जगह बना लेते जैसे आजकल अरब सरकारें कर रही हैं।
हमास, जेहादे इस्लामी और अन्य फ़िलिस्तीनी संगठन अगर खुलकर बयान देते हैं और ईरान तथा प्रतिरोधक मोर्चे का आभार व्यक्त करते हैं और कोरनेट मिसाइलों से आने वाली क्रांति पर प्रकाश डालते हैं तो इससे फ़िलिस्तीनियों की सज्जनता साबित होगी।
अमरीका और इस्राईल की ओर से फ़िलिस्तीनी राष्ट्र पर थोपी गई नाकाबंदी ज़्यादा दिन जारी नहीं रह पाएगी। फ़िलिस्तीनी संगठनों ने मिसाइलों और ड्रोन विमानों का जो सैन्य अभ्यास किया है वह बहुत बड़े बदलाव का इशारा है।
अबदुल बारी अतवान
अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार, अतवान फ़िलिस्तीनी मूल के हैं जो लंदन में रहते हैं।